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०८ सोमबार, भाद्र २०८३21st July 2026, 3:28:44 pm

२६ बिहिबार , चैत्र २०८२५ महिना अगाडि

मूल्यवान समय, शरीर व्यर्थकिया बदलते रिश्तेनातों में,
नही आना था, आ गया पागल चिकनी चुपडीÞ बातों मे,
चोट लग ही जाती हैं, प्रीत काँचकी दुनिया से लगाने में,
कचोटता है घाव फिर हरदम अन्दर काली घनी रातोंँ मे

           – इन्दु तोदी